विज्ञापन में समाचार-हास्य कविता (vigyapan mein samachar-hasya kavita)


समाजसेवक जी ने
प्रचारक से कहा,
‘‘यार, रोज तुम घोटालों का
पर्दाफाश करते हो
क्या हमें मरवाओगे,
अभी तक हमारे चेले फंस रहे हैं
धीरे धीरे हमारे हाथ में हथकड़ी
पड़ जाने की नौबत तुम लाओगे,
मगर याद रखना
हमारे घोटालों में तुम भी भागीदार हो
इसलिये बच नहीं पाओगे।’’

सुनकर प्रचारक महोदय बोले
‘‘यार,
तुम भी निरे मूर्ख हो
घोटालों से हमारे समाचार सनसनीखेज बनते हैं,
विज्ञापनों में अपने जलवे इसलिये छनते हैं,
फिर तुम्हारे चेलों के भी चाटुकार इसमें फंस रहे हैं,
आम लोग बिना सोचे समझे हंस रहे हैं,
फिर हम एक घोटाले पर चलाते हैं
कुछ दिन चर्चा,
कार्यक्रम बनाने में भी नहीं आता खर्चा,
जैसे एक मामला थम जाता है,
फिर कोई नया मामला सामने आता है,
लोग पिछला भूल जाते हैं,
नये को तूल देने में फिर मजे आते हैं,
चिंता मत करो,
बस, भ्रष्टाचार पर
जनता के सामने आहें भरो,
तुम्हारा काम चलता रहेगा जीवन भर,
नहीं है तुम्हें फंसने का डर,
अपनी समाज सेवा की यात्रा
तुम स्वच्छ छवि के साथ तय कर जाओगे।’’
————-

कवि,लेखक संपादक-दीपक भारतदीप,Gwalior
http://dpkraj.blogspot.com
http://dpkraj.wordpress.com

यह आलेख इस ब्लाग ‘दीपक भारतदीप का चिंतन’पर मूल रूप से लिखा गया है। इसके अन्य कहीं भी प्रकाशन की अनुमति नहीं है।
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टिप्पणियाँ

  • shivkumar  On फ़रवरी 24, 2011 at 5:48 पूर्वाह्न

    बहुत सुंदर लेख ..
    दीपक जी कभी समय मिले तो http://shiva12877.blogspot.com ब्लॉग पर भी अपने एक नज़र डालें . धन्यवाद .

  • Munish  On फ़रवरी 25, 2011 at 11:51 पूर्वाह्न

    अतिसुन्दर, वाह

  • RAJIV MAHESHWARI  On मार्च 8, 2011 at 8:10 पूर्वाह्न

    ATI SUNDER…..KAVITA HA

  • Shraman N L  On अप्रैल 17, 2011 at 3:19 पूर्वाह्न

    स्मरण शक्ति तकनीकें (Techniques for Memorisation)
    चित्रं विचित्रं संक्षेप सारम्। काव्यं कथां गुरू:सूत्रौ आहारम्।।
    मिथ्यांक संधि व्यायामम्। योगेन्द्रि च विद्या व्याख्यानम्॥
    भाषा: चित्र बनाकर याद करना, लक्ष्य को अवास्तविक रूप देना, विषय को संक्षिप्त करना तथा सारांश समझना। विषय को कविता के रुप मे याद करना, कथा या कहानी का रुप देना, गुरू के सूत्र स्मरण करना, अंको को शब्दो व शब्दों को अंको मे बदलना, लक्ष्य को जोड़ना व तोड़ना, योगिक प्रयोग करना , आंख, कान, नाक, त्वचा व जिह्वा का प्रयोग करना,भाषण को दुहराना ॥
    Prose: A picture is thousand times worth for memory, Imagine objects unrealistic, absurd, nonsnese,ridiculous , Extract brief and summary to understand the subject. Memorise in the form of poetry, narrative or story , Guru’s Sutras for recall, change numbers to the words and vice versa, compose, de compose, synthesise and analyse, experiment with physical exercises, Use senses like ears, nose, skin and tongue, repeat speech.

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