चाणक्य नीति:समय के अनुसार न सोचना विपत्तियों को बुलाना


  1. जो नीच प्रवृति के लोग दूसरों के दिलों को चोट पहुचाने वाले मर्मभेदी वचन बोलते हैं, दूसरों की बुराई करने में खुश होते हैं। अपने वचनों द्वारा से कभी-कभी अपने ही वाचों द्वारा बिछाए जाल में स्वयं ही घिर जाते हैं और उसी तरह नष्ट हो जाते हैं जिस तरह रेत की टीले के भीतर बांबी समझकर सांप घुस जाता है और फिर दम घुटने से उसकी मौत हो जाती है।

  2. समय के अनुसार विचार न करना अपने लिए विपत्तियों को बुलावा देना है, गुणों पर स्वयं को समर्पित करने वाली संपतियां विचारशील पुरुष का वरण करती हैं। इसे समझते हुए समझदार लोग एवं आर्य पुरुष सोच-विचारकर ही किसी कार्य को करते हैं। मनुष्य को कर्मानुसार फल मिलता है और बद्धि भी कर्म फल से ही प्रेरित होती है। इस विचार के अनुसार विद्वान और सज्जन पुरुष विवेक पूर्णता से ही किसी कार्य को पूर्ण करते हैं।

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टिप्पणियाँ

  • sharad patil  On मई 30, 2009 at 11:23 पूर्वाह्न

    schoolar man

  • sharad patil  On मई 30, 2009 at 11:25 पूर्वाह्न

    positive thanking means

  • deepak srivastava  On जुलाई 20, 2010 at 10:04 पूर्वाह्न

    thanks

  • Jagmeet Sandhu  On जुलाई 28, 2010 at 3:08 पूर्वाह्न

    AWESOME!!

  • Ramkumar bhurewal  On जून 15, 2011 at 1:15 अपराह्न

    क्या आप लोक तंत्र मे जी रहे हो ? आप लोक तंत्र मे नही आप एक राजनैतिक षडयंत्र मे फ़से हुए हो हा ये सच है इस समय ये कुछ ज्यादा त्रासदायक नही है लेकिन आगे आप हर प्रकार से भ्रष्टाचार हमे प्राभावित करेंगा

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