स्वेट मार्डेन:रोटी के फुलाव की जरूरत


एक बार किसी महिला ने अपने पति को रोटी के स्वादिष्ट न होने का कारण बताते हुए कहा-”इस रोटी में अच्छी रोटी के तमाम गुण मौजूद हैं तो भी इसके खाने में इसलिए स्वाद नहीं आता क्योंकि इसको पकाते समय यह फूली नहीं थी.”
प्रत्येक व्यक्ति में कोई न कोई स्वाभाविक गुण विद्यमान रहता है जिसे वह अवसर न मिलने के कारण प्रकट नहीं कर पाता. आप कल्पना करें की किसी युवक में संगीत के प्रति ह्रदय में अंतर्मन की गहराईयों तक प्रेम है पर दूरस्थ किसी गाँव में खेती का काम करता है जहाँ उसे न तो किसी संगीत सभा में जाने का अवसर मिलता है और किसी संगीत के जानकार से उसका संपर्क हो पाता है. अचानक उसे शहन जाना पड़े और वह कहीं किसी संगीत सभा में जाता या सिनेमा में जाता तब उसके अन्दर पहले से विद्यमान संगीत प्रेम का गुण जाग उठता है. उसे हृदय में का संगीत प्रेमी नाचने लगता है, वह उल्लासित होता है और तब वही युवक एक नये रूप में प्रकट होता है. अवसर मिलते उसका लक्ष्य ही संगीत सुनना हो जाता है.

इसलिए हमेशा ऐसे अवसरों की तलाश में जाना चाहिए जो हमारे स्वाभाविक गुणों को उबारने में मदद कर सकें. उन अनेक युवकों पर यही बात लागू होती है जिनमें सभी गुण विद्यमान हैं. उनमें शक्ति और योग्यता दोनों ही मौजूद है. बस आवश्यकता है तो’रोटी के फुलाव की’. अत: उन्हें विचलित नहीं होना चाहिए.

लेखकीय अभिमत-इसी तरह जिन लोगों में इतनी शक्ति है की दूसरों को अवसर दे सकें उन्हें भी यह सोचना चाहिए कि नये लोगों को जिनके पास अनुभव नहीं है उनको पहले परखें ऐसे ही न नकारें बल्कि यह देखने का प्रयास करें कि उस व्यक्ति के स्वाभाविक गुण कहीं उनके अनुकूल तो नहीं हैं.

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टिप्पणियाँ

  • Anand Sharma  On मार्च 3, 2008 at 5:23 अपराह्न

    Loved reading Hindi Pearls of Wisdom from Great Wizards. Memory was refreshed what was read in teens, in Hindi class. Thanks a lot Mr.Deepak Bharatdeep.

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