मनुस्मृति-गायत्री मंत्र से मिलती है मन को शांति

योऽधीतेऽहन्यहन्येतांस्वीणि वर्षाण्यतन्द्रितः।
स ब्रह्म परमभ्येति वायुभूतः खमूर्तिमान्।।
हिंदी में भावार्थ-
जो व्यक्ति सुस्ती का त्याग कर तीन वर्षों तक औंकार तीन व्याहृतियों सहित तीन चरणों वाले गायत्री मंत्र का जाप करता है वह भक्ति में सिद्धि प्राप्त कर लेता है। वह वायु के समान स्वतंत्र गति प्राप्त करते हुए प्रसिद्ध होता है। वह शरीर की सीमा से परे जाकर आसमान के समान व्यापक स्वरूप वाला बन जाता है।
एकक्षरं परं ब्रह्म प्राणायमः परं तपः।
सवित्र्यास्तु परं नास्ति मौनस्तयं विशष्यिते।।
हिंदी में भावार्थ-
ओंकार शब्द ही परमात्मा की प्राप्ति का सर्वश्रेष्ठ साधन है। प्राणायम से बड़ा कोई तप, गायत्री से बड़ा कोई मंत्र और मौन की तुलना में सत्य बोलना श्रेष्ठ है।
वर्तमान संदर्भ में संपादकीय व्याख्या-अक्षरों में सबसे बड़ा अक्षर ओउम ॐ कहा गया है। मंत्रों में गायत्री मंत्र श्रेष्ठ है। प्रतिदिन ओउम शब्द के उच्चारण का अभ्यास करने से व्यक्ति के मन में एकाग्रता और सुविचारों के प्रवाह का स्तोत्र का निर्माण होता है। उसी तरह हृदय को शीतलता, स्थिरता और दृढ़ता प्रदान करने के लिये गायत्री मंत्र एक तरह से उद्गम स्थल है। जब तीव्र गर्मी पड़ती है तब सूर्य की तेज किरणों से मनुष्य का मन और मस्तिष्क विचलित हो जाता है। कहने को मनुष्य विचारशील और विवेकवान है पर उस पर जलवायु का प्रभाव होता है और तीव्र गर्मी में मनुष्य के अंदर निराशा, क्रोध और हिंसा की प्रवृत्ति का स्वाभाविक रूप से निर्माण होता है। यह नहीं भूलना चाहिये कि गुण ही गुणों में बरतते हैं और जलवायु में अगर तीव्र उष्मा है तो मनुष्य उसे नहीं बच सकता। हां, जो लोग अध्यात्मिक रूप से कोई न कोई प्रयास करते हैं वह अपने को किसी तरह हिंसा, कुविचार और निराशा से बचाकर निकलते हैं। इसके लिये सर्वश्रेष्ठ प्रयास यही है कि गायत्री का मंत्र जाप किया जाये। इससे जो देह, मन और विचारों में शीतलता और पतित्रता आती है उससे मनुष्य तनाव से मुक्त रहता है। विशेष रूप से ग्रीष्मकालीन समय में जब आसपास के मनुष्यों में गर्मी का बुरा प्रभाव पड़ता है तब वह अपने बुरे व्यवहार से पूरे वातावरण को विषाक्त बना देते हैं तब जिसके मन में गायत्री मंत्र के जाप से उत्पन्न स्थिरता, दृढ़ता और प्रसन्नता के भाव होते हैं वह तनाव से मुक्त रहते हैं।
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संकलक एवं संपादक-दीपक भारतदीप

2 Responses

  1. aapke mantrarth se sampurn sansar papo se mukt hokar aadhyaatmik pravriti ki aur agrasar hoga. hum aur sansar ka pratyek aadami aapka aabhari hai. dhanyavad

  2. maine app ka lakh parha hai. aap ke lakh mann ko shakti dety hain.app ko dhanyavad.

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