विदुर नीति: खामोशी की बजाय सच बोलना ठीक
- बोलने से न बोलना अच्छा बताया गया है, किन्तु सत्य बोलना भी एक गुण है। चुप या मौन रहने से सत्य बोलना दो गुना लाभप्रद है। सत्य मीठी वाणी में बोलना तीसरा गुण है और धर्म के अनुसार बोला जाये यह उसका चौथा गुण है।
- मनुष्य जैसे लोगों के साथ रहता है और जिन लोगों की सेवा में रहता है और जैसी उसकी कामनाएं होतीं है वैसा ही वह हो भी जाता है।
- मनुष्य जिन विषयों से मन हटाता है उससे उसकी मुक्ति हो जाती है। इस प्रकार यदि सब और से निवृत हो जाये तो उसे कभी भी दुख प्राप्त नहीं होगा।
- जो न तो स्वयं किसी से जीता जाता है न दूसरों को जीतने के इच्छा करता है न किसी से बैर करता और न दूसरे को हानि पहुंचाता है और अपनी निंदा और प्रशंसा में भी सहज रहता है वह दुख और सुख के भाव से परे हो जाता है।
————-
यह पाठ मूल रूप से इस ब्लाग‘दीपक भारतदीप की अंतर्जाल पत्रिका’ पर लिखा गया है। अन्य ब्लाग
1.दीपक भारतदीप की शब्द लेख पत्रिका
2.शब्दलेख सारथि
3.दीपक भारतदीप का चिंतन
संकलक एवं संपादक-दीपक भारतदीप
This entry was written by
दीपक भारतदीप, posted on
April 10, 2009 at 5:04 am, filed under
Deepak bapu,
Deepak bharatdeep,
Hindi Education,
Hindi knowledge,
Hindu darshan,
Religion,
hindi blogging,
hindi india,
hindi megzine,
hindi shastra,
hindi thinking,
hindu dharm,
web bhasakar,
web dunia,
web duniya,
web express,
web jagaran,
web nai duniya,
web panjabkesri,
आध्यात्म,
समाज,
हिंदी पत्रिका,
हिन्दी and tagged
adhyatm,
अध्यात्म,
धर्म,
हिंदू,
chup,
dharm,
hindu,
ram,
ramayan,
relegion,
shastra,
vidur. Bookmark the
permalink. Follow any comments here with the
RSS feed for this post.
or leave a trackback:
Trackback URL.
One Comment
pls provide me 5 dohas on meethi vani