रहीम के दोहेःगुणहीन व्यक्ति पशु के समान
रहिमन सो न कछु गनै, जासों, लागे नैन
सहि के सोच बेसाहियो, गया हाथ को चैन
कविवर रहीम कहते हैं कि जिन मनुष्यों को नयनों के माध्यम से प्रेम संबंध हो जाता है, वह दुनियां का कोई विचार नहीं करते। जो लोग ऐसा प्यार करते हैं उनको यह समझ लेना चाहिए कि उनके जीवन का चैन गया और सब कुछ सहकर इस झगड़े को मोल लेना चाहिए।
रहिमन विद्या बुद्धि नहिं, नहीं धरम, जस, दान
भू पर जनम वृथा धरै, पसु बिन पूंछ बिषान
कविवर रहीम कहते हैं कि जिन मनुष्यों में विद्या, बुद्धि, धर्म, यश और दान जिस व्यक्ति में नहीं है उनका इस धरती पर जन्म लेना ही व्यर्थ हो जाता है। वह लोग पशु के समान हैं।
रहिमन वित्त अधर्म को, जरत न लागै बार
चोरी करि होरी रची, भई तनिक में छार
कविवर रहीम कहते हैं कि पाप के धन को नष्ट होने में अधिक देर नहीं लगती-जैसे चोरी कर होली की लकड़ी लायी जाती है* और वह कुछ ही पल में जल जाती है।
*पहले होलिकोत्सव पर लकड़ी लाने के लिए चोरी की जाती थी। समय के अनुसार अब यह परंपरा लुंप्त होती जा रही थी।
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बढ़िया प्रस्तुति.