चाणक्य नीति:हमेशा झगडा करने वाला संकट में रहता है
Posted on March 27, 2008 by दीपक भारतदीप
१.अपने परिवार के सदस्यों के साथ उदारता, अन्य लोगों के साथ दया, कुटिल से कठोरता, सज्जनों से प्रेम तथा दुष्ट से अभिमान, विद्वानों से विनम्रता, शत्रुओं से वीरता और बडों से क्षमा प्रार्थना का व्यवहार करने वाला व्यक्ति सदा ही सुखी रहता है।
२.बिना सोचे समझे खर्च करने वाला, अनाथ (मटर गश्ती करने वाला) और हमेशा झगडा करने वाला सदैव संकट में रहते हैं।
३.अन्न से दस गुना आटे में, आटे से दस गुना दूध में, दूध से दस गुना मांस में और मांस से दस गुना घी में शक्ति होती है।
४.शोक से रोग, दूध से शरीर, घी से वीर्य और मांस से मांस बढ़ता है।
Filed under: Blogroll, Deepak bharatdeep, Global dashbord, Hindu culture, Hindu darshan, bharat, chanakya, chankya, hindi bharat, hindu dharm, inglish, web bhasakar, web dunia, web duniya, web jagaran, web nai duniya, आध्यात्म, आलेख, कला, समाज, सूचना, हिंदी पत्रिका