चाणक्य नीति:परनिंदा न करने वाले ही लोकप्रिय होते हैं
1.संसार में किसी को भी मनचाहा सुख प्राप्त नहीं होता। सामान्यत: सुख-दुख के प्राप्ति मनुष्य के हाथ में न होकर परमात्मा के हाथ में हैं।
2.जिस तरह बछड़ा हजारों पहुसों के बीच में अपनी माता को ढूंढ कर उसके निकट पहुंच जाता है और उसका स्तनपान करने लगता है वैसे ही मनुष्य का कर्म भी उसका पीछा करता है और उसका फल उसे अवश्य मिलता है।
3.जो वास्तविक तत्व ज्ञान कर उपदेश करने वाले गुरु को सम्मान नहीं देता वह शिष्य पहले कुत्ते की योनि में जन्म लेने के चांडाल की योनि में उत्पान होता है।
4.अगर आप समाज में लोगों की समक्ष अपनी लोकप्रियता पाना चाहते हैं तो दूसरों की निंदा करना बंद कर दो। परनिंदा करना मनुष्य की स्वाभाविक प्रवृति है और इसकी वजह से वह दूसरे को छोटा साबित कर अपने को बड़ा साबित करना चाहता है। जो दूसरों के निंदा नहीं करते वह लोगों में लोकप्रिय होते हैं।
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