चाणक्य नीति:अपनी बातें यथासंभव गुप्त रखना चाहिए
बुद्धिमान व्यक्ति को चाहिए कि वह अपने धन की हानि, अपने मानसिक संताप, अपने घर-परिवार के सदस्यों के दोष तथा किसी दुष्ट द्वारा अपने पर किये गए प्रहार और अपमान की भूलकर भी किसी अन्य व्यक्ति से चर्चा न करे। इन सब बातों को यथासंभव गुप्त रखना चाहिए।
आज के संदर्भ में व्याख्या-लोग अक्सर अपनी बात अपने मन में नहीं रखते और दूसरों को अपनी बात बता देते हैं जो की बाद में उनके लियी हानिकारक होती है। हम नित-प्रतिदिन कई लोगों के संपर्क में रहते हैं और ऐसा लगता है कि वह हमारे लिए विश्वसनीय हैं यह हमारा भ्रम होता है। घर, कार्यालय, दूकान या किसी अन्य ऐसे स्थान पर जहाँ निय्मिति जाते हैं वहाँ हमसे रोज मिलने वाले लोग होते हैं और हमें यह भ्रम हो जाता है कि बस वह हमारे विश्वस्त हैं और हम उनके। इस चक्कर में हम उनको अपने परिवार, संताप और उपलब्धियों के बारे में बता देते हैं कि वह भला दूसरे को क्यों बताएगा? भावनात्मक प्रबाह में हम उनको ऐसी बाते भी बता देते हैं जो नहीं बताना चाहिऐ और वह जाकर सबको बता देता और हमें फिर संताप होता है।
इसलिए पाने घर-परिवार, संपदा और तकलीफों की जानकारी जहाँ तक हो सके गुप्त रखना चाहिए। जब तक आवश्यक न लगे किसी के सामने उसका बखान नहीं करना चाहिऐ।
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