रहीम के दोहे:गोत्र की वृद्धि पर हिरन भी उछलते हैं

रहिमन ठहरी धूरि की, रही पवन ते पुरि
गाँठ युक्ति की खुलि गयी, अंत धूरि को धूरि
कविवर रहीम कहते हैं की ठहरी हुई धूल जब हवा के सहारे ऊपर उठती हैं तो कष्ट कारक होती है. उसी तरह अगर कोई हमारे रहस्य की गाँठ है वह खुल जाती हैं तो कीं जगह नीचा देखना पड़ता है.

रहिमन अपने गोट को, सबै चहत उत्साह
मृग उछरत आकाश को, भूमि खनत कराह

कविवर रहीम कहते हैं की सब लोग अपने गोत्र की वृद्धि के इच्छुक होते हैं. हिरन आकाश तक उछलते हैं और सूअर पृथ्वी को खोदने लगते हैं.

3 Responses to “रहीम के दोहे:गोत्र की वृद्धि पर हिरन भी उछलते हैं”

  1. ऐसे दोहे पढ़ना अच्छा लगता है।

  2. गोत्र क्या है?
    गोत्र का इतिहास क्या है?
    एक समान गोत्र मे शादि करना कितना सही,कितना गलत है ?

    मै(जोगी/चोहान)अपनी हि जाति कि लडकी के साथ शादि करना चाहता हू किन्तु लडकी के पिताजी(जोगी /गोड) मेरी ही जाति मे किसी के गोद गये है और जिस परिवार मे गोद गये है उन्का गोत्र भी चोहान है। समान गोत्र होने के कारण लडकी के परिवार वाले शादि से इन्कार कर रहे है।

    क्या यह सही है?

    मुझे उदाहरण तथा वैग्यानिक तथ्य सहित उत्तर दे ।

    मै -रवि योगी
    योग्यता -जी ऐन ऐम नर्स
    आयु -२३ वर्ष

    लडकी -रानी योगी
    योग्यता -ऐम ऐ,बी ऐड
    आयु -२१ वर्ष

  3. 1- Samarath Ko Nahi Dosh gusai.
    2- Sabe Sahayak Sabal Ke, Kou Na Nibal Sahay.
    Pawan Jagawat Aag Ko, Deepahi Det Bujhay.
    3-Gotra Vyavastha Manushykrit Hain Inka Vaigyanik
    Auchitya Nahi Hai.

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