चाणक्य नीति:स्वार्थ के लिए दूसरी जगह जाने पर सम्मान काम होता है

१.प्रत्येक व्यक्ति को सब कुछ उपलब्ध नहीं होता, यदि ऐसा होता तो मनुष्य के लिए पृथ्वी ही स्वर्ग की तरह हो जाती. कई चीजें जीवन में भाग्य से मिलती हैं.
२.चद्रमा अमृत का भंडार है. औषधियों में रस डालें वाला है, लक्ष्मे के साथ समुद्र से उत्पन्न होने के कारण लक्ष्मी का भाई है और अत्यंत शीतल, चमकीला, और शोभायुक्त है परन्तु सूर्य के निकट पहुँचते ही एकदम निस्तेज हो जाता. चंद्रमा की यह दशा इस बात का प्रमाण है कि दूसरे के घर जान से मनुष्य का बड़प्पन बना नहीं रहता खासतौर से जब अपने काम के लिए किसी के घर जाते हैं तो गृहस्वामी के समक्ष छोटे हो जाते हैं.
३.अपने स्थान पर रहते हुए भंवरा कमलिनी के पराग के रस को पीकर मस्त रहता पर कुछ समय पश्चात उस स्थान पर चला गया वहाँ करील के फूल पैदा होते थे जिनमें न रस था न गंध. बाध्य होकर उसे वहाँ संतोष करना पडा वहाँ उन्हीं का रस पीकर उनको ही गौरव देने लगा-कुछ न मिलने से तो कुछ मिलना ही अच्छा है.

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