विदुर नीति:जिसकी वाणी रूखी वह महादरिद्र
1.दूसरों से गाली सुनकर भी स्वयं उन्हें गाली न दे। क्षमा करने वाले का रोका हुआ कोर्ध ही गाली देने वाले को जला डालता है और उसके पुण्य भी ले लेता है।
२.दूसरों को न तो गाली दे और न उसका अपमान करे, मित्रों से द्रोह तथा नीच स्वभाव के व्यक्ति की सेवा न करे। सदाचार से हीन एवं अभिमानी न हो। रूखी तथा रोष भरी वाणी का परित्याग करे।
३.इस जगत में रूखी बातें मनुष्य के मर्मस्थान, हड्डी, ह्रदय तथा प्राणों को दग्ध करती रहती हैं इसलिए धर्मानुरागी पुर्ष जलाने वाली रूखी बातों को सदा के लिए परित्याग करें।
४.जिसकी वाणी रूखी और स्वभाव कठोर है, जो मर्म पर आघात करता और वाग्बाणों से मनुष्य को पीडा पहुंचाता है, उसे ऐसा समझना चाहिए कि वह मनुष्यों में महादरिद्र है और वह अपने मुख में दरिद्रता अथवा मौत को बांधे हुए ढो रहा है।
५.यदि दूसरा कोई इस व्यक्ति को अग्नि और सूर्य के समान दग्ध करने वाली तीखे वाग्वाणों से बहुत चोट पहुँचाए तो वह विद्वान व्यक्ति चोट खाकर अत्यंत वेदना सहते हुए भी ऐसा समझे के वह मेरे पुण्यों को पुष्ट कर रहा है।
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