संत कबीर वाणी:बिना देह के कौतुक देखा
गुरु मिले शीतल भया, मिति मोह तन पाया
निशि वासर सुख निधि लहूँ, अन्तर प्रगटे आप
संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं की सदगुरु मिले तो मन में शीतलता आ गई और तन और मन का जो मोह था वह मिट गया. हृदय में परमात्मा प्रगट हो गए और दिन-रात का हर पल सुखमय हो गया
कौतुक देखा देह बिन, रवि शशि बिना उजास
साहिब सेवा माहिं हैं, बेपरवाही दास
संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि बिना देह ऐसा महान आश्चर्यपूर्ण दृश्य देखा की वहाँ पर सूर्य-चंद्रमा के बिना ही उजाला है. उस स्थिति में वहाँ साहेब परमात्मा के सेवा में भक्त बेपरवाह होकर लगे हुए हैं.
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