शब्द बोलते जगह देखकर-कविता

पढ़ते हैं कोई भाषा की बड़ी किताब
लगाते फिर अपने पढे पाठों का हिसाब
साहित्य के शब्दों से परहेज
गणित में ही होता उनका हिसाब

कौन समझाए किसको
अंकों के खेल में दो और दो चार होते
पर शब्दों के कभी कई अर्थ होते
नाम है कुछ
इशारा कहीं और होता
सिंह कभी बहादुर तो
लोमडी जैसा कहीं चालाक आदमी
और सांप का मतलब कहीं
दुष्ट भी होता
कभी-कभी हंसी में भी
रोने का आभास होता
शब्द बोलते हैं जगह देखकर
होता नहीं उनका कोई हिसाब
किताब में छापी कहानी बोलती है
कविता चहकती है
गीत गाते हैं
गणित में एक और एक दो होते
शब्दों में होते एक और एक ग्यारह
भाषा के अर्थ वह क्या समझेंगे
जिन्होंने पढी नहीं उसकी किताब
लगाते हैं जो शब्दों का अंकों की तरह हिसाब
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