रहीम के दोहे:चतुर को चूकने की कसक होती हैं .

रहिमन कुटिल कुठार ज्यों, करि डारत द्वै टूक
चतुरन के कसक्त रहे समय चूक की हूक

कविवर रहीम कहते हैं की जैसे कठोर कुल्हाड़ी लकडी के दो टुकड़े कर देती है, उसी प्रकार चतुर व्यक्तियों के समय पर चूक जाने से हृदय में कसक बनी रहती हैं.

One Response to “रहीम के दोहे:चतुर को चूकने की कसक होती हैं .”

  1. bahut sahi,there r great expectations from great mens,so if they go wrong at sometime,hruday mein kasak reh jati hai.

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