चाणक्य नीति:परिवार में मिलजुलकर खाना खाएं
मनुष्य को चार गुण मुर्गे से ग्रहण करना चाहिए-समय पर जागना, युद्ध की ललकार के लिए तत्पर रहना, खाते समय मिल-जुलकर अपने परिवार के लोगों में बांटकर खाना और स्वयं खोजकर खाद्य पदार्थ जुटाना.
संपादकीय अभिमत- चाणक्य ने यहाँ जीवन में सफलता और प्रशिद्ध पाने के जो गुण बताये हैं वह अनुकरणीय है. अपने निर्धारित समय पर जागना चाहिए ताकि हमारा पूरे दिन का कार्यक्रम सही तरह से चल सके. जीवन में कहीं भी हमारे सामने कोई चुनौती आती है तो उसका सामना करने के लिए तत्पर रहना चाहिए. कई बार ऐसा अवसर आता है कि हम किसी बडे काम करने से घबडाते हैं कि वह हमारे बस का नहीं है तो यह गलत है. जो लोग बडे काम करते हैं वह भी आखिर मनुष्य ही तो होते हैं. परिवार में सबको मिलकर खाना चाहिए ताकि आपस में प्रेम बढे. कहते हैं कि जो शरीर के पास होता है वही दिल के पास होता है. दिन भर जो लोग घर के बाहर रहते हैं और रात को आते हैं तो परिवार के अनेक सदस्य सो जाते हैं-और इस तरह एक घर में रहते हुए भी दिल की दूरी बढ़ती दिखती हैं. अगर सब मिलकर खाना खाएँगे तो शरीर भी पास होंगे और इस तरह दिल का लगाव भी बना रहेगा. इसके अलावा हर व्यक्ति को आत्म-निर्भर होना चाहिए. किसी पर आश्रित होने से आदमी का मान-सम्मान काम हो जाता है.
बुद्धिमान मनुष्य इन गुणों का अपने अन्दर समावेश कर अपना आचरण करेगा तो वह अपने जीवन में हर कार्य में सफलता अर्जित करेगा. इन गुणों में जीवन की सफलता के मूल तत्व अन्तर्निहित हैं.
नोट-महापुरुषों के सन्देश कभी सीधे प्रसारित किये जाते हैं और कभी समय होने पर उनकी आज के संदर्भों में व्याख्या के साथ प्रस्तुत किये जाते हैं. इसलिए कभी-कभी पूर्व में उल्लेखित संदेशों की पुनरावृति भी हो सकती है.
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