रहीम के दोहे:ह्रदय कुएँ से अधिक गहरा नहीं होता
रहिमन थोरे दिनन को, कौन करे मुहँ स्याह
नहीं छलन को परतिया, नहीं कारन को ब्याह
कवि रहीम कहते हैं कि कुछ समय के लिए मनुष्य अपने मुहँ पर कालिमा क्यों लगाए? दूसरी स्त्री को धोखा नहीं दिया जाता और न ही विवाह ही किया जा सकता.
भावार्थ-दूसरी स्त्री को प्रेम का दिखावा कर उसे धोखा देना ही है, और उससे विवाह कर तो निभाया भी नहीं जा सकता. कोई पुरुष एक समय में दो स्त्रियों के साथ एक जैसा प्रेम नहीं कर सकता. अत उसे एक विवाह ही करना चाहिऐ.
गुन ते लेत रहीम जन, सलिल कूप ते काढि
कूपहु ते कहूँ होत है, मन काहू को बाढी
कवि रहीम कहते हैं कि जिस प्रकार लोग रस्से के दवारा कुएँ से पानी निकल लेते हैं उसी प्रकार अच्छे गुणों द्वारा दूसरों के ह्रदय में अपने लिए प्रेम उत्पन्न कर सकते हैं क्योंकि किसी का हृदय कुएँ से अधिक गहरा नहीं होता.
Filed under: Deepak bharatdeep, Hindi Education, Hindi friends, Hindi writing, Hindu darshan, dashboard, dohe, hindi Personal, hindi astha, hindi bharat, hindi blogging, hindi life, hindi megzine, hindi sanskar, hindi sant, hindi shabd, hindi thinking, hindi vichar, hindi yog, hindu dharm, rahim, web bhasakar, web dunia, web duniya, web jagaran, web nai duniya, आध्यात्म, रहीम, समाज, हिंदी पत्रिका